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कभी-कभार, खाँसी और सर्दी-जुकाम किसी गंभीर रोग के लक्षण होते हैं। जिस बच्चे को ऐसे में साँस लेने में कठिनाई हो रही हो या वह जल्दी-जल्दी साँस ले रहा हो तो उसे न्युमोनिया हो सकता है, जो फेफड़ा का एक संक्रमण है। यह एक प्राणघातक बीमारी है और उस बच्चे को तुरंत किसी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र से उपचार की आवश्यकता है।

कभी-कभार, खाँसी और सर्दी-जुकाम किसी गंभीर रोग के लक्षण होते हैं। जिस बच्चे को ऐसे में साँस लेने में कठिनाई हो रही हो या वह जल्दी-जल्दी साँस ले रहा हो तो उसे न्युमोनिया हो सकता है, जो फेफड़ा का एक संक्रमण है। यह एक प्राणघातक बीमारी है और उस बच्चे को तुरंत किसी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र से उपचार की आवश्यकता है।

खाँसी और सर्दी-जुकाम, गला खराब होना और बहती नाक के अधिकतर दौर दवा की आवश्यकता के बिना ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभार ये बीमारियाँ न्युमोनिया के लक्षण होते हैं, जो फेफड़ा का संक्रामक रोग है और सामान्यत: उसमें ऍटिबायोटिक्स की आवश्यकता होती है।

यदि कोई स्वास्थ्य कर्मचारी न्युमोनिया के उपचार के लिये एंटिबायोटिक्स देता है, तो यह आवश्यक है कि निर्देशों का पालन किया जाये और उन्हीं निर्देशों के अनुसार जब तक आवश्यकता हो दवा दी जाये, चाहे बच्चा ठीक ही क्यों न हो जाये।

अभिभावकों द्वारा बीमारी की गंभीरता नहीं पहचान पाने और तुरंत चिकित्सकीय सुविधा नहीं उपलब्ध होने से बहुत सारे बच्चे मर जाते हैं। न्युमोनिया के कारण मरनेवाले बहुत सारे बच्चों को बचाया जा सकता है यदि:

माता-पिता और परिपालक यह समझ जायें कि तेज गति से साँस लेना और साँस लेने में कठिनाई होना, दोनों ही खतरे के लक्षण हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद की आवश्यकता होती है।

चिकित्सकीय मदद और कम खर्चीली दवाइयाँ तुरंत उपलब्ध है।

यदि बच्चे में निम्न लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत किसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी या स्वास्थ्य केंद्र जाना चाहिये:

बच्चा सामान्य से अधिक गति से साँस ले रहा हो: 2 से 12 महीने के बच्चे के लिये-एक मिनट में 50 या अधिक बार श्वास; 12 महीने से 5 साल तक के बच्चे के लिये– एक मिनट में 40 या अधिक बार श्वास ले रहा हो

बच्चा कठिनाई से श्वास ले रहा हो या हवा के लिए छटपटा रहा हो

जब बच्चा श्वास अंदर खींचता है तो छाती का निचला हिस्सा अंदर धँस रहा हो, या फिर ऐसा लग रहा हो जैसे पेट ऊपर-नीचे की ओर कर रहा हो। बच्चे को दो सप्ताह से अधिक समय से खाँसी हो। बच्चा स्तनपान करने या कुछ पीने में असमर्थ हो।