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डॉक्टर, नर्स या प्रशिक्षित दाई जैसे प्रसव के लिए प्रशिक्षित लोगों से गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार महिला की जांच करानी चाहिए और हरेक प्रसव में सहयोग करनी चाहिए।

डॉक्टर, नर्स या प्रशिक्षित दाई जैसे प्रसव के लिए प्रशिक्षित लोगों से गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार महिला की जांच करानी चाहिए और हरेक प्रसव में सहयोग करनी चाहिए।

हरेक गर्भावस्था ध्यान दिये जाने की मांग करती है, इसलिए कि कुछ गड़बड़ हो जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। कई खतरों को टाला जा सकता है, अगर महिला को गर्भ ठहरने का अंदेशा हो तो उसे जल्द स्वास्थ्य केंद्र या प्रसव के लिए प्रशिक्षित लोगों से मदद लेनी चाहिए।

इसके बाद हरेक गर्भावस्था के दौरान उसकी कम से कम चार बार जांच होनी चाहिए और हर प्रसव के 12 घंटे बाद और छह सप्ताह बाद भी जांच करायी जानी चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान अगर खून रिस रहा हो या पेट में दर्द हो या ऊपर दर्ज किये गये खतरे का कोई भी निशान हो, तो तुरंत स्वास्थ्य कार्यकर्ता या लोगों से संपर्क करनी चाहिए।

प्रसव के समय प्रशिक्षित कर्मियों का सहयोग और प्रसव के 12 घंटे बाद हुई मां की जांच, मां या बच्चे के बीमार पड़ने या मर जाने की संभावना घटा देती है।

प्रशिक्षित कर्मियों, जैसे डॉक्टर- नर्स या प्रशिक्षित दाई सुरक्षित गर्भावस्था और शिशु के स्वस्थ होने में इस तरह मदद करेगा-

गर्भावस्था प्रगति की जांच, ताकि कोई समस्या आने पर प्रसव के लिए महिला को अस्पताल पहुंचाया जा सके।

उच्च रक्तचाप की जांच, जो मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

नियमित रूप से खून कमी की जांच और आयरन/फोलिक पूरक देकर उसकी पूर्ति।

मां और नवजात शिशु को संक्रमण से बचाने के लिए विटामिन की पर्याप्त खुराक का नुस्खा देकर;

विटामिन ए की कमी वाले इलाकों में।

गर्भावस्था के दौरान किसी भी संक्रमण, खास कर पेशाब के रास्ते के संक्रमण की जांच और

एंटीबायोटिक से उसका इलाज करके।

मां और नवजात शिशु को टिटनेस से बचाव के लिए गर्भवती महिला को टिटनेस का दो इंजेक्शन देकर।

घेंघा रोग से खुद को और अपने बच्चे को संभावित दिमागी और शारीरिक अपंगता से बचाने में मदद के लिए सभी गर्भवती महिलाओं को भोजन में केवल आयोडीन नमक के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर।

यह जांच करके कि गर्भ की बढ़त ठीक है या नहीं।

अगर जरूरी हो तो मलेरिया रोधी गोली देना।

प्रसव के अनुभवों के लिए मां को तैयार करना और उसे स्वयं तथा अपने बच्चे की देखभाल करने और अपना दूध पिलाने के बारे में सलाह देकर तैयार करना।

गर्भवती महिला और उसके परिवार को सलाह देकर कि बच्चा कहां पैदा हो और अगर प्रसव या प्रसव के तुरंत बाद कोई दिक्कत आये तो मदद कैसे हासिल की जाये।

यह सलाह देकर कि यौन-जनित संक्रमणों से कैसे बचा जा सकता है।

एच.आई.वी की स्वैच्छिक और गोपनीय जांच और सलाह उपलब्ध करा कर। सभी महिलाओं को

एच.आई.वी की स्वैच्छिक और गोपनीय जांच और सलाह का अधिकार है। जो गर्भवती और नयी माताएं संक्रमण का शिकार हैं या उन्हें अंदेशा रहता कि वे कहीं संक्रमण का शिकार तो नहीं हैं।

उन्हें प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता से सलाह लेनी चाहिए कि अपने शिशुओं को संक्रमण के खतरों से कैसे बचाया जा सकता है, और कैसे अपनी देखभाल की जा सकती है।

प्रशिक्षित व्यक्ति जानता है कि प्रसव के दौरान-

प्रसव काल लंबा खिंच रहा है (12 घंटे से अधिक) तो उसे कब अस्पताल ले जाने की जरूरत है। चिकित्सीय मदद की कब जरूरत है और उसे कैसे हासिल किया जाये। संक्रमण के खतरों को कैसे कम किया जाये; साफ-सुथरे हाथ, साफ-सुथरे औजार और प्रसव की साफ-सुथरी जगह। अगर बच्चे की स्थिति सही नहीं है तो क्या किया जाये। अगर मां को बहुत खून आ रहा है तो क्या किया जाये। नाभि नाल कब काटी जाये और उसकी देखभाल कैसे की जाये। अगर सही तरीके से बच्चा सांस लेना शुरू नहीं करता तो क्या किया जाये। जन्म के बाद बच्चे को सूखा और गर्म कैसे रखा जाये। जन्म के तुरन्त बाद बच्चे को मां का दूध कैसे पिलाया जाये। जन्म के बाद कौन सी सावधानी बरती जाये और मां की देखभाल कैसे की जाये। अंधेपन से बचाने के लिए सुझायी गयी बूंदें नवजात शिशु की आंख में कैसे डाली जायें।

प्रसव के बाद प्रशिक्षित कर्मियों को चाहिए कि -

जन्म के 12 घंटे के अंदर और छह सप्ताह के बाद, महिला के स्वास्थ्य की जांच करें।

अगले गर्भधारण को रोकने या टालने के लिए महिला को सलाह दें।

महिला को सलाह दें कि एच.आई.वी जैसे यौन जनित संक्रमण से बचाव कैसे किया जा सकता या

शिशुओं के संक्रमण का शिकार हो जाने के खतरों को कैसे कम किया जा सकता है।