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सभी गर्भवती महिलाओं का टिटनेस से बचने के लिए टीकाकृत होना जरूरी होता है। यदि किसी महिला से कुछ समय प‍हले ही टीका लगवाया हो, तो भी उसे अतिरिक्‍त टिटनेस के टीके की आवश्‍यकता हो सकती है। टिटनेस का टीका लगवाने और सलाह के लिए स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता से बात करनी चाहिए।

सभी गर्भवती महिलाओं का टिटनेस से बचने के लिए टीकाकृत होना जरूरी होता है। यदि किसी महिला से कुछ समय प‍हले ही टीका लगवाया हो, तो भी उसे अतिरिक्‍त टिटनेस के टीके की आवश्‍यकता हो सकती है। टिटनेस का टीका लगवाने और सलाह के लिए स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता से बात करनी चाहिए।

विश्‍व के बहुत से हिस्‍सों में माँ अस्‍वच्‍छ परिस्थितियों में बच्‍चे को जन्‍म देती हैं। यह मां और बच्‍चे दोनों को टिटनेस के खतरे में डाल सकता है, यह नवजात शिशुओं की मौतों का मुख्‍य कारण होता है। यदि गर्भवती महिला टिटनेस से टीकाकृत नहीं है, तो टिटनेस का बैक्टिरिया या विषाणु उसके शरीर में प्रवेश कर उसके जीवन को खतरे में डाल सकता है।

टिटनेस बैक्टिरिया या विषाणु कटी हुई गंदी जगह पर वृद्धि करता है। यदि नाभी सम्‍बन्‍धी कॉर्ड के अंतिम सिरे को गंदे चाकू से काटा या उसे गंदे हाथों से छुआ गया हो तो यह विषाणु वृद्धि कर सकता है। कॉर्ड को काटने का किसी भी तरह के औजार को सबसे पहले साफ कर और फिर उबाला या आग पर गर्म कर ठंडा किया जाना चाहिए। जन्‍म के पहले छह हफ्तों के लिए बच्‍चे की नाभी सम्‍बन्‍धी कॉर्ड को

साफ रखना चाहिए।

सभी गर्भवती महिलाएं को निश्चिंत होने के लिए टिटनेस के टीके लगवाए हैं या नहीं यह देख लेना चाहिए। यह मां और नवजात शिशु दोनों की रक्षा करता है। टिटनेस के विरुद्ध टीका लगवाना गर्भवती महिला के लिए सुरक्षित होता है। उसे अवधि के मु‍ताबिक टीकाकरण करवाना चाहिए।

टिटनेस के टीके लेने का समय

पहली खुराक: जब भी उसे यह पता चले कि वह गर्भवती है।

दूसरी खुराक: पहली खुराक लेने के एक महीने बाद और निर्धारित तारीख के दो सप्ताह बाद से पहले, बाद में नहीं।

तीसरी खुराक: दूसरी खुराक के 6 से 12 महीनों बाद या अगली बार गर्भवती होने के दौरान। चौथी खुराक: तीसरी खुराक के एक साल बाद या गर्भावस्‍‍था के दौरान। पांचवी खुराक: चौथी खुराक के एक साल बाद या गर्भावस्‍था के दौरान।

यदि एक लड़की या महिला ने निर्धारित समय के अनुसार पांचों बार टीकाकरण करवाया हो, तो वह जीवन भर के लिए सुरक्षित है। उसके बच्‍चे भी जीवन के कुछ हफ्तों के लिए सुरक्षित होंगे।

टीकाकरण मुख्‍य संदेश - ५

प्रत्‍येक व्‍यक्ति को टीका लगाने के लिए नई या उबली हुई सुई और सिरिंज ही इस्‍तेमाल होनी चाहिए। लोगों को इसके लिए जोर देना चाहिए।

सुई या उपकरण जो नये या पूरी तरह साफ न हों, जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारियों के कारण हो सकते हैं। परिवार के सदस्‍यों के बीच भी एक ही सिरिंज और सुई का इस्‍तेमाल जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारियों को फैला सकता है। केवल नई और साफ सुई और सिरिंज ही इस्‍तेमाल में लाई जानी चाहिए।

टीकाकरण मुख्‍य संदेश - ६

जब लोग भीड़-भाड़ वाले जगह में होते हैं तो बीमारी तेजी से फैल सकती है। अत्‍यन्‍त सघन परिस्थितियों में खासकर शरणार्थी या खतरनाक परिस्थितियों में रहने वाले सभी बच्‍चों को जल्‍द से जल्‍द खासकर खसरे का टीके लगवानी चाहिए।

आपातकालीन और घर छोड़ने जैसी स्थितियों में अक्‍सर लोग संचारित बीमारियों के फैलने को बढ़ा देते हैं। इसलिए 12 वर्ष से कम उम्र के सभी विस्‍थापित बच्‍चों का जल्‍द से जल्‍द टीकाकरण करवाना चाहिए, सम्‍पर्क और प्रबंधन के पहले बिंदु, खासकर खसरे के लिए।

आपातकाल में टीकाकरण के लिए इस्‍तेमाल की जाने वाली सिरिंज स्वयं असक्रिय हो जाए यानी अपने आप जो एक बार के बाद काम न करे।

खसरा तब और अधिक गंभीर होता है, जब बच्‍चा कुपोषण या अस्‍वच्‍छ परिस्थितियों में रह रहा हो। चूंकि, खसरा बहुत तेजी से फैलता है, इसलिए इससे पीड़ित बच्‍चे को अन्‍य बच्‍चों से अलग रखने और प्रशिक्षित स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता द्वारा जांचने की जरूरत होती है।

खसरा गंभीर हैजा का कारण हो सकता है। खसरे से टीकाकृत बच्‍चे हैजा को रोक सकते हैं। यदि टीकाकरण की श्रृंखला किसी वजह से टूट जाए तो राष्‍ट्रीय निर्देशों के मुताबिक उसे पूरा करने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता से सलाह-मशविरा करनी चाहिए।