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खेलने और खोजबीन के लिए मिलने वाला बढ़ावा बच्चों को सीखने और उनमें सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक और दिमागी विकास में मदद करता है।

खेलने और खोजबीन के लिए मिलने वाला बढ़ावा बच्चों को सीखने और उनमें सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक और दिमागी विकास में मदद करता है।

बच्चे आनंद के लिए खेलते हैं, लेकिन खेल उनके सीखने और विकास करने की कुंजी भी है। खेलने से बच्चों के ज्ञान और अनुभव को आकार लेने और उनकी उत्सुकता और विश्वास के विकास में मदद मिलती है।

बच्चे चीजों को आजमाते हुए, नतीजों की तुलना करते हुए, सवाल पूछते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए सीखते हैं। खेलना, भाषा सीखने, सोचने, योजना बनाने, संगठित होने और फैसला लेने के कौशल का विकास करता है।

अगर बच्चा विकलांग है, तो उत्तेजना और खेल की जरुरत खास तौर पर बढ़ जाती है।

लड़कियों और लड़कों के खेलने और परिवार के सभी सदस्यों से घुलने-मिलने के समान मौकों की जरूरत होती है। पिता के साथ खेल और मेलजोल दोनों के बीच मजबूत रिश्ता बनाने में मददगार होता है।

परिवार के लोग और बच्चों की देखभाल करने वाले बच्चों को साफ-साफ हिदायतों के साथ मामूली काम सौंप कर, खेलने की चीजें दे कर और खेल पर दबदबा बनाये बगैर नयी गतिविधियां सुझा कर सीखने में बच्चों की मदद कर सकते हैं। बच्चे पर करीबी निगाह रखें और उनके विचारों पर गौर करें।

बिना किसी की मदद के छोटा बच्चा अगर कोई काम करने की जिद करें तो उनकी देखभाल करने वालों को धीरज से काम लेने की जरूरत है। बच्चे सफलता मिलने तक कोशिश करके सीखते हैं। जब तक बच्चा किसी खतरे से दूर है, नया और मुश्किल काम करने की जद्दोजहद बच्चे के विकास के लिए अच्छा कदम है।

सभी बच्चों को अपने विकास की अवस्था के मुताबिक तरह-तरह की सरल चीजों से खेलने की जरूरत है। पानी, बालू, गत्ते के बक्से, लकड़ी के गुटके, बर्तन और ढक्कन खेलने का उतना ही अच्छा सामान हैं, जितने कि दुकान से खरीदे गये खिलौने।

बच्चे लगातार योग्यताओं को बदलते और विकसित करते हैं।