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जिस किसी को भी एच.आई.वी/एड्स के संक्रमण का संदेह हो, उन्हें किसी स्वास्थ्य कर्मचारी या एच.आई.वी/एड्स केन्द्र में जाकर गोपनीय काउंसिलिंग और परीक्षण प्राप्त करनी चाहिए।

जिस किसी को भी एच.आई.वी/एड्स के संक्रमण का संदेह हो, उन्हें किसी स्वास्थ्य कर्मचारी या एच.आई.वी/एड्स केन्द्र में जाकर गोपनीय काउंसिलिंग और परीक्षण प्राप्त करनी चाहिए।

एच.आई.वी काउंसिलिंग और परीक्षण एच.आई.वी संक्रमण का जल्दी पता लगाने और जिनको संक्रमण हो चुका है, उन्हें उचित सहायता सेवाएँ देने में, उन्हें यदि अन्य कोई संक्रामक बीमारी हो तो उसके उपचार में मदद करता है और एच.आई.वी /एड्स के साथ किस प्रकार से जीना है और अन्य लोगों को किस प्रकार इसके संक्रमण से बचाना है, इस बात का ज्ञान प्राप्त करते हैं।

काउंसिलिंग और परीक्षण उन लोगों को भी मदद करता है जिन्हें संक्रमण नहीं हुआ है और उन्हें सुरक्षित यौन संबंध के द्वारा असंक्रमित रहने के बारे में सिखाया जाता है।

यदि किसी एच.आई.वी/एड्स के परीक्षण का परिणाम नकारात्मक आता है, तो इसका मतलब है कि वह व्यक्ति असंक्रमित है या फिर इस समय वायरस का परीक्षण करना जल्दबाजी कहलायेगा।

एच.आई.वी के लिये किया गया रक्त परीक्षण पहले छह महीनों में संक्रमण को पहचान न पाये, यह संभव है।

एच.आई.वी के किसी भी संभाव्य संपर्क का संदेह होने पर यह परीक्षण छह महीने बाद फिर करा सकते हैं। इस प्रकार से संक्रमित व्यक्ति वायरस कभी भी फैला सकता है, सेक्स के दौरान कंडोम का प्रयोग करना या पेनिट्रेशन को टालना बहुत महत्वपूर्ण है।

परिवार और समुदायों को एच.आई.वी/एड्स के गोपनीय काउंसिलिंग, परीक्षण और जानकारी की माँग करनी चाहिये जिससे कि वयस्कों और बच्चों को इसके संक्रमण से बचाने में मदद मिलेगी।

एच.आई.वी /एड्स ग्रस्त दंपति को बच्चों को जन्म देने के बारे में सोच समझकर निर्णय लेनी चाहिये। यदि एक पार्टनर संक्रमित है तो गर्भधारणा के प्रयास के दौरान वह दूसरे को भी संक्रमित कर सकता है।

यदि युवा एच.आई.वी के फैलाव के माध्यमों के बारे में तथ्यों को जान लें, सेक्स से दूर रहें, और सेक्स के दौरान कंडोम का प्रयोग करें तो एच.आई.वी को आनेवाली पीढ़ी में फैलने से रोकना संभव है।