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कोई भी बच्‍चा जो हल्‍का बीमार, अक्षम या कुपोषित हो, उसका टीकाकरण करवाना सुरक्षित होता है। बच्‍चों को टीकाकृत करवाने हेतु न लाने का प्रमुख कारण होता है कि जिस दिन टीकाकरण किया जाना होता है उस दिन वे बुखार, खांसी, सर्दी, हैजा या अन्‍य बीमारियों से घिरे होते हैं। हालांकि, यदि बच्‍चा हल्‍का बीमार हो तो उसे टीकाकृत करवाना सुरक्षित होता है।

कोई भी बच्‍चा जो हल्‍का बीमार, अक्षम या कुपोषित हो, उसका टीकाकरण करवाना सुरक्षित होता है। बच्‍चों को टीकाकृत करवाने हेतु न लाने का प्रमुख कारण होता है कि जिस दिन टीकाकरण किया जाना होता है

उस दिन वे बुखार, खांसी, सर्दी, हैजा या अन्‍य बीमारियों से घिरे होते हैं। हालांकि, यदि बच्‍चा हल्‍का बीमार हो तो उसे टीकाकृत करवाना सुरक्षित होता है।

कभी-कभी जो बच्‍चा अक्षम या कु‍पोषित हो उसका टीकाकरण न करवाने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता ही सलाह देते हैं। यह सलाह गलत है। अक्षम या कुपोषित बच्‍चों का टीकाकरण करवाना सुरक्षित होता है।

इंजेक्‍शन के बाद बच्‍चा रो सकता है या उसे बुखार, थोड़ा लालीपन या वह कष्‍टकारी हो सकता है। यह सामान्‍य होता है। थोड़े-थोड़े अंतराल पर स्‍तनपान या बच्‍चे को प्रचुर मात्रा में द्रव्‍य या भोजन करवाएं। यदि बच्‍चे को तेज बुखार हो, तो बच्‍चे को स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र लेकर जाना चाहिए।

क्‍योंकि कुपोषित बच्‍चे के लिए खसरा अत्‍यधिक खतरनाक हो सकता है, उन्‍हें खसरे के विरुद्ध टीकाकृत करवाना चाहिए, खासकर यदि कुपोषण की स्थिति गंभीर हो।