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यदि अभिभावक अथवा बच्चों का ध्यान रखने वाले व्यक्ति सजग रहें व बच्चों के खेलने के स्थान को सुरक्षित रखा जाए तो बहुत सी क्षतियां टाली जा सकती है।

यदि अभिभावक अथवा बच्चों का ध्यान रखने वाले व्यक्ति सजग रहें व बच्चों के खेलने के स्थान को सुरक्षित रखा जाए तो बहुत सी क्षतियां टाली जा सकती है।

18 माह से लगाकर 4 वर्ष तक के बच्चों को ज़ोखिम व मृत्यु से बचाना सबसे ज्यादा ज़रूरी है। इनमें से अधिकाँश दुर्घटनाएं घर पर ही होती है। इनमें से सभी का बचाव किया जा सकता है।

घर पर होने वाली दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है-

आग से जलना, स्टोव, ओवन, खाना पकाने के बर्तन, गरम खाना, उबलता हुआ पानी, वाष्प, गरम घी या तेल, पैराफिन लैंप, इस्त्री व विद्युत उपकरण

टूटे कांच, चाकू, कैंची या कुल्हाड़ी से कट जाना

पलंग, खिड़की, मेज़ या सीढ़ियों से गिर जाना

सिक्के, बटन या किसी गिरी का गले में फंस जाना

ब्लीच व डिटर्जेन्ट, पैराफिन या कैरोसिन अथवा कीटनाशक से ज़हर का प्रभाव पड़ना

खुले या टूटे हुए विद्युत तार से करंट लग जाना अथवा उनके स्विच में कोई नुकीली वस्तु आदि डालना

जो भी वस्तु सक्रिय हो और वह छोटे बच्चों के लिये खतरनाक हो, उसे उनसे दूर ही रखा जाना चाहिये बच्चों से लंबे समय तक काम नहीं करवाया जाना चाहिये जिससे उनके लिये ज़ोखिम उत्पन्न हो

जायें अथवा उनकी पढ़ाई-लिखाई की दिनचर्या अव्यवस्थित हो जायें। बच्चों को भारी काम तथा खतरनाक उपकरण व ज़हरीले रसायनों से बचाया जाना चाहिये।