हिन्दी | বাংলা | অসমীয়া |
सभी परिवारों के लिए गर्भावस्था और प्रसव के खतरों के निशान की पहचान करने में सक्षम होना और अगर समस्या उठती है तो तुरंत प्रशिक्षित लोगों से मदद हासिल करने के लिए योजना और संसाधनों का होना महत्वपूर्ण है।

सभी परिवारों के लिए गर्भावस्था और प्रसव के खतरों के निशान की पहचान करने में सक्षम होना और अगर समस्या उठती है तो तुरंत प्रशिक्षित लोगों से मदद हासिल करने के लिए योजना और संसाधनों का होना महत्वपूर्ण है।

हरेक गर्भावस्था में कुछ गड़बड़ हो जाने का खतरा रहता है। इन कई पेचीदगियों से बचा जा सकता है। मां और बच्चे दोनों के लिए पहला प्रसव सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।

गर्भवती महिला को हरेक गर्भधारण के दौरान क्लीनिक या स्वास्थ्य केंद्रों पर कम से कम चार बार जांचे जाने की जरूरत होती है। इस बारे में कि बच्चा कहां पैदा होना चाहिए, प्रसव के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है ;जैसे डॉक्टर, नर्स या दाई।

चूंकि गर्भावस्था के दौरान बिना चेतावनी के खतरनाक दिक्कत खड़ी हो सकती है, इसलिए प्रसव के पहले या प्रसव के तुरंत बाद परिवार के सभी सदस्यों को यह जानने कि जरूरत हों कि नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र कहां है, और किसी भी समय महिला को वहां तक ले जाने के लिए योजना और धन का इंतजाम करने की जरूरत है।

अगर संभव है तो मां बनने वाली महिला को फौरी तौरपर स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल के नजदीक ले जाना चाहिए, ताकि वह चिकित्सकीय मदद की पहुंच में रहे।

परिवार को अगर पता हो कि प्रसव मुश्किल या खतरनाक हो सकता है तो प्रसव को अस्पताल या जच्चा-बच्चा केंद्र में होना चाहिए। सभी प्रसव, खासकर पहला प्रसव, जच्चा-बच्चा केंद्र या अस्पताल में ज्यादा सुरक्षित होता है।

सभी परिवारों को खास खतरों के बारे में जानने और कभी भी आने वाली दिक्कतों के खतरों के निशानों की पहचान में सक्षम होने की जरूरत है।

गर्भावस्था से पहले के खतरों के कारक

पिछले प्रसव के बाद दो साल से भी कम का समय का अंतर हो। लड़की की उम्र 18 साल से कम या महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा हो। महिला के पहले से ही चार या उससे अधिक बच्चे हों। महिला का पिछला प्रसव समय से पहले हुआ हो या उसका बच्चा जन्म के समय 2 किलोग्राम से भी कम वजन का रहा हो। महिला को पिछले प्रसव में भी दिक्कत आयी हो या ऑपरेशन से प्रसव हुआ हो। पिछली बार गर्भ गिर चुका हो या महिला को मरा बच्चा हुआ हो। महिला का वजन 38 किलोग्राम से कम हो। महिला का खतना हुआ हो या उसके यौन अंग काटे गये हों।

गर्भावस्था के दौरान खतरे के निशान

वजन का न बढ़ना; गर्भावस्था के दौरान कम से कम 6 किलोग्राम बढ़ना चाहिए। खून की कमी, पलकों के भीतर पीलापन; स्वस्थ पलें लाल या गुलाबी होती हैं, बहुत थकान या सांस फूलना। पैर, हाथ या चेहरे पर गैर मामूली सूजन। गर्भ का चलना बहुत कम या बिल्कुल नहीं। मदद की तुरंत जरूरत वाले निशान गर्भावस्था के दौरान योनि से खून या उसके थक्के आना या प्रसव के बाद खून का ज्यादा या लगातार आना। सिर या पेट में जबरदस्त दर्द होना। गंभीर रूप से या लगातार उल्टियां होना। तेज बुखार आना। बच्चे की पैदाइश के तयशुदा समय से पहले पानी आना। ऐंठन होना। तेज दर्द होना। प्रसव का लंबा खिंचना।