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बच्‍चों को बीमारी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और आंखों के दोष को रोकने के लिए विटामिन ए की आवश्‍यकता होती है।

बच्‍चों को बीमारी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और आंखों के दोष को रोकने के लिए विटामिन ए की आवश्‍यकता होती है।

विटामिन ए काफी फलों और सब्जियों, तेलों, अण्‍डे, दूध उत्‍पाद, फोर्टिफाइड भोजन, मां के दूध, या विटामिन ए पूरक में पाया जा सकता है।

जब तक बच्‍चे छह महीने के नहीं होते, मां का दूध उनकी जरूरत के मुताबिक विटामिन ए उपलब्‍ध कराता है, बशर्ते मां के भोजन में पर्याप्‍त विटामिन ए या पूरक हो। छह महीने से अधिक आयु के बच्‍चों को अन्‍य खाद्य या पूरकों से भी विटामिन की जरूरत होती है।

विटामिन ए लीवर, अण्‍डे, दूध उत्‍पाद, चर्बी वाली मछली, पके हुए आमों और पपीते पीले मीठे हरे पत्ते वाली सब्जियों और गाजर में होता है।

जब बच्‍चा पर्याप्‍त विटामिन ए नहीं ले रहा हो, तो उसे रतौंधी होने का खतरा होता है। यदि बच्‍चा शाम या रात में मुश्किल से देख पा रहा हो, तो उसे संभवत: अधिक विटामिन ए की जरूरत होगी। बच्‍चे को विटामिन ए की गोलियों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता के पास ले जाना चाहिए।

कुछ देशों में विटामिन ए तेल और अन्‍य भोजन में दि‍या जाता है। विटामिन ए गोली और द्रव्‍य दोनों रूपों में उपलब्‍ध होता है। बहुत से देशों में छह महीने से लेकर पांच वर्ष तक के बच्‍चे को साल में दो बार विटामिन ए की गोलियां बांटी जाती हैं।

हैजा और खसरा बच्‍चे के शरीर में विटामिन ए की मात्रा को घटा देता है। विटामिन ए की पूर्ति थोड़े-थोड़े अंतराल पर अधिक बार स्‍तनपान करवाने से और छह महीने से अधिक उम्र के बच्‍चे को अधिक फल और सब्जियां, अण्‍डे, लीवर और दूध उत्‍पाद देकर की जा सकती है।

14 दिनों से ज्‍यादा चलने वाले हैजा और खसरे से पीड़ित बच्‍चे को स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता से विटामिन ए दिलवाया जाना चाहिए।