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ज़हर, दवाईयां, ब्लीच, एसिड और तरल ईंधन जैसे पैराफिन को कभी भी पेयजल की बोतलों में नही रखा जाना चाहिये। इस प्रकार के समस्त तरल पदार्थों को विशेष बोतलों में रखा जाना चाहिये जो कि बच्चों की पहुंच से दूर हो

ज़हर, दवाईयां, ब्लीच, एसिड और तरल ईंधन जैसे पैराफिन को कभी भी पेयजल की बोतलों में नही रखा जाना चाहिये। इस प्रकार के समस्त तरल पदार्थों को विशेष बोतलों में रखा जाना चाहिये जो कि बच्चों की पहुंच से दूर हो

बच्चों को ज़हर का असर होना बड़ा खतरनाक हो सकता है। ब्लीच, कीटाणुनाशक व चूहा मार दवा, पैराफिन व घरेलू डिटर्जेन्ट से बच्चों को स्थायी नुकसान हो सकता है

कई ज़हर ऐसे होते हैं जिनका सिर्फ निकला जाना ही ज़हरीला नहीं होता वरन् निम्न प्रकार से शरीर में जाने पर भी वे मस्तिष्क व आंखों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं, यदि उन्हें-

सूंघा जाए

बच्चे की आंख या त्वचा पर लग जाए बच्चों के कपड़ा पर लग जाए

यदि ज़हर को शीतल पेय, बीयर की बोतल, जार या कप में रखा जाए, तब बच्चे गलती से उन्हें पी सकते हैं। सभी ज़हर, रसायन व दवाईयों को उनके सही बोतलों व बर्तनों में सही तरीके से बंद कर रखा जाना चाहिये।

डिटर्जेन्ट, ब्लीच, रसायन व दवाईयों को बच्चों की पहुंच से दूर रखी जानी चाहिये। उन्हें सही तरीके से बंद कर लेबल लगा दी जानी चाहिये। उन्हें किसी पेटी में बंद कर अथवा काफी ऊंचाई पर रखा जाना चाहिये जिससे बच्चे वहां पहुंच न सकें।

वयस्कों के लिये बनाई गई दवाईयां छोटे बच्चों के लिये खतरनाक हो सकती है। बच्चों को सिर्फ उनके लिये लिखे गये नुस्खे के अनुसार ही दवाई दी जानी चाहिये न कि किसी वयस्क अथवा अन्य बच्चे के लिये लिखी गई दवाई।

न्टीबायोटिक्स का अधिक अथवा गलत उपयोग करने से बच्चों में बहरेपन की समस्या आ सकती है। बच्चों को दवाईयां सही नुस्खे के अनुसार ही दी जानी चाहिये। एस्प्रिन से सबसे ज्यादा नुकसान होता है। इसलिये इसे बच्चों की पहुंच से दूर रखनी चाहिये।